आजमगढ़। उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता के अवसर अधिनियम–2026 के विरोध में बुधवार को सवर्ण आर्मी भारत के पदाधिकारियों ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। बाद में जिला प्रशासन को अपनी मांग का ज्ञापन सौंपा।
प्रदेश सचिव ओंकार नाथ पाठक ने कहा कि यूजीसी की ओर से लाया गया यह बिल समानता पर आधारित न होकर पूरी तरह जातिगत भेदभाव को बढ़ावा देने वाला है। उन्होंने आरोप लगाया कि कानून के माध्यम से सवर्ण समाज को आक्रांता के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, जो ना तो राष्ट्रहित में है और ना ही समाजहित में।
प्रस्तावित नियम के अंतर्गत गठित की जाने वाली इक्विटी कमेटी में सवर्ण समाज का कोई प्रतिनिधि नहीं रखा है, जो न्यायसंगत नहीं है। साथ ही यदि सवर्ण छात्रों पर झूठी प्राथमिकी दर्ज की जाती है, तो उनके झूठे साबित होने पर शिकायतकर्ता के विरुद्ध किसी दंड का प्रावधान नहीं है, जो चिंताजनक है।
प्रदेश सचिव ने आशंका जताई कि इस कानून के लागू होने से जातिगत पूर्वाग्रह से ग्रसित लोग बड़ी संख्या में झूठी प्राथमिकी दर्ज कराएंगे, इससे सवर्ण समाज के छात्रों का भविष्य प्रभावित हो सकता है। सवर्ण आर्मी भारत ने केंद्र सरकार से इस कथित विभाजनकारी कानून को तत्काल वापस लेने की मांग की।
इस अवसर पर जिलाध्यक्ष निखिल राय, सुधाकर राजेश्वर पांडेय, मनिंदर सिंह, रूपम सिंह, अभिषेक, नंदू सहित अन्य पदाधिकारी और सदस्य मौजूद रहे।
