
बॉम्बे हाईकोर्ट ने अबू सलेम की रिहाई याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि 25 साल की सजा पूरी होने का दावा अभी मान्य नहीं है और रिमिशन पर निर्णय समय से पहले है। सरकार के अनुसार सलेम ने करीब 19 साल ही जेल में बिताए हैं, इसलिए उसकी रिहाई फिलहाल संभव नहीं है।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को गैंगस्टर अबू सलेम की तत्काल रिहाई की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। सलेम ने अपनी याचिका में दावा किया था कि पुर्तगाल से प्रत्यर्पण के दौरान तय शर्तों के अनुसार वह भारत में 25 साल की सजा पूरी कर चुका है, इसलिए उसे रिहा किया जाना चाहिए।
न्यायमूर्ति ए.एस. गडकरी और न्यायमूर्ति कमल खता की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि इस स्तर पर यह मानना उचित नहीं है कि सलेम 25 साल की सजा पूरी कर चुका है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अच्छे आचरण के आधार पर मिलने वाली सजा में छूट (रिमिशन) को अभी जोड़कर कुल अवधि तय करना जल्दबाजी होगी।
याचिका खारिज करते हुए अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के एक महत्वपूर्ण फैसले का हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि किसी भी कैदी की सजा में छूट की गणना उसकी संभावित रिहाई से लगभग एक माह पहले की जानी चाहिए। ऐसे में फिलहाल सलेम की ओर से सजा पूरी होने का दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता।
हालांकि, अदालत का विस्तृत आदेश अभी जारी नहीं हुआ है, लेकिन मौखिक टिप्पणी में पीठ ने स्पष्ट कर दिया कि सलेम की रिहाई का मामला इस समय विचारणीय नहीं है। सलेम की ओर से अधिवक्ता फरहाना शाह के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया था कि वर्ष 2005 में जब उसे पुर्तगाल से भारत लाया गया था, तब यह आश्वासन दिया गया था कि उसे न तो मृत्युदंड दिया जाएगा और न ही 25 वर्ष से अधिक की सजा होगी। इसी आधार पर उसने अपनी रिहाई की मांग की थी।
वहीं, केंद्र सरकार ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि अबू सलेम अभी तक करीब 19 वर्ष ही जेल में बिता पाया है और उसकी समय से पूर्व रिहाई पर निर्णय प्रक्रिया अभी लंबित है।
गौरतलब है कि अबू सलेम 1993 के मुंबई सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में दोषी करार दिया जा चुका है और उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद फिलहाल उसकी रिहाई की संभावना टल गई है।
