ध्वनि प्रदूषण मामले में डीजीपी और परिवहन आयुक्त तलब

हाईकोर्ट ने ध्वनि प्रदूषण पर सख्ती दिखाते हुए अधिकारियों से जवाब मांगा है। मोडिफाइड साइलेंसर और हूटर पर कार्रवाई की जानकारी देने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, एनजीटी ने वन्यजीव अधिसूचना मामले में प्रगति रिपोर्ट तलब कर राज्य सरकार को समयसीमा में कार्रवाई करने को कहा है।
हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने ध्वनि प्रदूषण से जुड़े एक मामले में सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने पुलिस महानिदेशक और परिवहन आयुक्त को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने का आदेश दिया है।
कोर्ट ने अधिकारियों से पूछा है कि पिछले पांच साल में मोडिफाइड साइलेंसर और हूटर बनाने व बेचने पर रोक लगाने के लिए क्या कार्रवाई की गई। साथ ही, अगली सुनवाई से पहले दोनों अधिकारियों को लिखित जवाब (हलफनामा) देने को भी कहा है।
यह मामला साल 2021 में मोडिफाइड साइलेंसरों से ध्वनि प्रदूषण विषय पर स्वतः संज्ञान लेकर शुरू की गई जनहित याचिका से जुड़ा है। अदालत ने पहले ही आदेश दिया था कि ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों की एक कमेटी बनाई जाए। लेकिन, इस बार सुनवाई में राज्य सरकार यह नहीं बता सकी कि ऐसी कोई कमेटी बनी है या नहीं।

इस पर कोर्ट ने कहा कि आधी रात में भी मोडिफाइड साइलेंसर और हूटर की तेज आवाज सुनाई देती है, और इसे रोकने की जिम्मेदारी मुख्य रूप से गृह विभाग और परिवहन विभाग की है। मामले की अगली सुनवाई 2 अप्रैल को होगी।
यूपी में वन्यजीव अधिसूचना प्रक्रिया पर एनजीटी सख्त
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की प्रधान पीठ ने उत्तर प्रदेश में वन्यजीव अधिसूचना प्रक्रिया की प्रगति की समीक्षा करते हुए राज्य सरकार को अगली सुनवाई से पहले विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
डॉ. शरद गुप्ता बनाम भारत संघ एवं अन्य की सुनवाई के दौरान पीठ ने 17 मार्च को दाखिल प्रगति रिपोर्ट पर विचार किया। यह रिपोर्ट मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव), पश्चिमी क्षेत्र, उत्तर प्रदेश की ओर से प्रस्तुत की गई थी। यह सूर सरोवर पक्षी अभ्यारण्य, आगरा से संबंधित है।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने बताया कि 21 मई 2025 को दायर शपथपत्र में तय समयसीमा का पालन किया गया है। करीब 14.5025 हेक्टेयर भूमि से जुड़े प्रस्ताव की जांच और परीक्षण की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। प्रस्ताव को आगे की कार्रवाई के लिए राज्य सरकार को भेज दिया गया है।

राज्य की ओर से यह भी कहा गया कि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत अंतिम अधिसूचना 2 मई तक जारी होने की संभावना है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अधिकरण ने निर्देश दिया कि अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले ताजा प्रगति रिपोर्ट दाखिल की जाए। मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को निर्धारित की गई है।

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