भीम आर्मी के पदाधिकारी को थाने में पीटा, पुलिस बोली- झूठ

आजमगढ़ के जहानागंज थाने में भीम आर्मी से जुड़े एक पदाधिकारी के साथ मारपीट का आरोप सामने आया है। भीम आर्मी के मंडल महासचिव रहे शोभा प्रसाद का आरोप है कि वह बाबा साहेब पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर थाने पहुंचे थे, जहां उनके साथ अभद्रता और मारपीट की गई।
जहानागंज थाने में भीम आर्मी से जुड़े एक पदाधिकारी के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आया है। भीम आर्मी के मंडल महासचिव रहे शोभा प्रसाद ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि थाना प्रभारी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। घटना को लेकर दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे सामने आने से मामला चर्चा का विषय बन गया है।
पीड़ित शोभा प्रसाद के अनुसार, वह बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर पर सोशल मीडिया में की गई आपत्तिजनक टिप्पणी के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर जहानागंज थाने पहुंचे थे। उनका कहना है कि थाने
पहुंचने पर उन्होंने बताया कि इस संबंध में उनकी पहले से ही एसओ से बातचीत हो चुकी है और कार्रवाई का आश्वासन मिला है।
आरोप है कि इसी दौरान वहां मौजूद दीवान ने उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया और अन्य पुलिसकर्मियों के साथ मिलकर मारपीट की। शोभा प्रसाद ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने उनका मोबाइल फोन छीन लिया और घटना का वीडियो, जो उन्होंने बनाया था, उसे डिलीट करा दिया।
कार्रवाई की मांग
वहीं, भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष एडवोकेट शेष नाथ राव ने भी इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि एक युवक द्वारा बाबा साहेब पर आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने के विरोध में शोभा प्रसाद थाने गए थे, लेकिन पुलिसकर्मियों ने उनके साथ दुर्व्यवहार करते हुए मारपीट की और थाने से भगा दिया। उन्होंने बताया कि घटना के बाद शोभा प्रसाद को घायल अवस्था में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।

दूसरी ओर, जहानागंज थाना प्रभारी अतुल कुमार मिश्रा ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। उनका कहना है कि संबंधित व्यक्ति शिकायत लेकर थाने आया था, लेकिन वह अंदर वीडियो बनाने लगा। मना करने पर उसे बाहर जाने के लिए कहा गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी प्रकार की मारपीट नहीं की गई है।

थाना प्रभारी ने यह भी बताया कि सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट के मामले में पहले ही कार्रवाई की जा चुकी थी। आदित्य राज की शिकायत पर आदित्य सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था और दोनों पक्षों को थाने बुलाकर समझौता करा दिया गया था। ऐसे में बाद में भीम आर्मी पदाधिकारी के आने का कारण स्पष्ट नहीं है। फिलहाल, मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा का माहौल है।

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