स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर प्रदेशभर में विरोध, ऊर्जा मंत्री ने बुलाई बैठक

स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर जनता का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। मामले में राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने ऊर्जा विभाग और मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर हस्तक्षेप की मांग की है। ऊर्जा मंत्री ने मामले में 13 को बैठक बुलाई है।
उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर व्यवस्था के विरोध में उपभोक्ताओं का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर उपभोक्ता प्रीपेड मीटर को पोस्टपेड में बदलने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। ऐसे में राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने ऊर्जा विभाग और मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर हस्तक्षेप की मांग की है।
प्रदेश में करीब 70 लाख से अधिक उपभोक्ताओं के यहां प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगा दिए गए हैं। जबकि केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने स्पष्ट आदेश जारी किया है कि अब सिर्फ स्मार्ट मीटर लगेंगे। उपभोक्ता अपनी मर्जी के हिसाब से प्रीपेड अथवा पोस्टपेड का चयन कर सकता है। इस आदेश के जारी होने के बाद विभिन्न स्थानों पर उपभोक्ता अपने मीटर को पोस्टपेड में बदलने की मांग कर रहे हैं। लखनऊ, गाजीपुर, जौनपुर, उन्नाव, फतेहपुर, जालौन सहित कई जिलों में उपकेंद्रों पर विरोध प्रदर्शन भी होने लगे हैं।
हर हाल में मीटरों को बदलना पड़ेगा- वर्मा
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने विभिन्न स्थानों पर प्रीपेड को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शन को देखते हुए मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि पावर कार्पोरेशन तत्काल प्रीपेड की अनिवार्यता को खत्म करने और अब तक लगाए गए प्रीपेड को पोस्टपेड में बदलने का आदेश जारी करे। उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि प्रदर्शन के दौरान किसी भी तरह की सरकारी संपत्ति को नुकसान न करें। उपभोक्ता परिषद उनके अधिकारों को लेकर संवैधानिक लड़ाई लड़ने के लिए तैयार है।

ऊर्जा मंत्री ने 13 को बुलाई बैठक
ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने 13 अप्रैल को स्मार्ट मीटर को लेकर बैठक बुलाई है। वह मऊ से सभी बिजली कंपनियों के अधिशासी अभियंताओं एवं उच्च अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए समीक्षा करेंगे। ऐसे में उपभोक्ता परिषद ने उम्मीद जताई है कि इस दिन कोई बड़ा और सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा। परिषद ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही भारत सरकार की गाइडलाइन के अनुरूप निर्णय नहीं लिया गया तो प्रदेशभर में आंदोलन शुरू हो सकता है।

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