झुग्गी-झोपड़ी में रहने और ईंट-भट्टे में काम करने वाले बच्चों पर फोकस करेगी सरकार

प्रदेश सरकार के द्वारा स्कूल चलो अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत अब एक मई से उन बच्चों पर विशेष तौर पर फोकस किया जाएगा जो झुग्गी-झोपड़ी में रहते हैं।

प्रदेश में एक अप्रैल से स्कूल चलो अभियान व्यापक स्तर पर चलाया जा रहा है। बेसिक शिक्षा विभाग का लक्ष्य है कि 6 से 14 साल का कोई भी बच्चा पढ़ाई से वंचित न रहे। उसका स्कूल में नामांकन हो और वह नियमित स्कूल जाए। इसी क्रम में 1 मई से प्रदेश में श्रमिक बस्तियों, ईंट-भट्ठों और झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले बच्चों को नामांकित किया जाएगा।

यह अभियान खास तौर पर आउट-ऑफ-स्कूल और ड्रॉपआउट बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने पर केंद्रित होगा। दिव्यांग बच्चों को स्पेशल एजूकेटर के सहयोग से चिन्हित कर उनका नामांकन सुनिश्चित किया जाएगा। वहीं ड्रॉपआउट बालिकाओं को कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (केजीबीवी) में प्राथमिकता के आधार पर प्रवेश दिलाया जाएगा।

बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने प्रदेश के सभी मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि हर बच्चे का नामांकन सुनिश्चित कराया जाए। स्कूल चलो अभियान के पहले चरण (1 से 15 अप्रैल) में 3 साल पूरा करने वाले बच्चों का आंगनबाड़ी-बाल वाटिका में नामांकन, 6 वर्ष के बच्चों का कक्षा-1 में और 7 से 14 साल के ड्रॉपआउट बच्चों की पहचान की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है।

उन्होंने कहा कि अब दूसरे चरण में इसे और तेज करते हुए छूटे हुए बच्चों तक सीधी पहुंच बनाएं। साथ ही कक्षा 5 से 6, 8 से 9 और 10 से 11 तक 100 प्रतिशत ट्रांजिशन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि पढ़ाई बीच में न छूटे। आरटीई के तहत निजी विद्यालयों में लॉटरी से चयनित बच्चों का शत-प्रतिशत प्रवेश सुनिश्चित कराने पर भी विशेष जोर दिया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि कोई भी पात्र बच्चा प्रवेश से वंचित न रहे।

आधारभूत ढांचे के गैप को पूरा करेंअपर मुख्य सचिव ने कहा है कि विद्यालयों के आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के लिए ऑपरेशन कायाकल्प और प्रोजेक्ट अलंकार के तहत काम किया जा रहा है। 19 मानकों के आधार पर विद्यालयों में सुविधाएं दी गई गई हैं। एक बार फिर से विशेष अभियान चलाकर शेष अवस्थापना संबंधी कमियों की पहचान करें। उन्हें सीएसआर और अन्य माध्यमों से पूरा करें। साथ ही विद्यांजलि पोर्टल पर सभी विद्यालयों को ऑनबोर्ड कर गैप एनालिसिस दर्ज कराएं। स्वयंसेवी संस्थाओं-वालंटियर्स के सहयोग से सुविधाओं का विस्तार सुनिश्चित कराएं।

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