
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंजूरी के बाद आदेश जारी कर दिया गया है। इसके बाद 57 हजार से ज्यादा पंचायतों में निवर्तमान प्रधानों को ही प्रशासक की जिम्मेदारी दी जाएगी।
उत्तर प्रदेश की ग्राम पंचायतों में अब विकास कार्य नहीं रुकेंगे। पंचायत चुनाव में देरी को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मौजूदा ग्राम प्रधानों को ही छह माह तक प्रशासक बनाए जाने को मंजूरी दे दी है। पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर के निर्देश पर प्रमुख सचिव पंचायती राज अनिल कुमार ने सोमवार को इसका आदेश जारी कर दिया।
अब बुधवार से प्रदेश की सभी 57694 ग्राम पंचायतों में निवर्तमान प्रधान प्रशासक की भूमिका निभाएंगे। इससे गांवों में सफाई, पेयजल, मनरेगा, सड़क मरम्मत और अन्य जरूरी विकास कार्य चलते रहेंगे। सरकार ने यह फैसला पंचायत चुनाव में आरक्षण प्रक्रिया लंबी होने के कारण लिया है। पिछड़ा वर्ग आरक्षण तय करने के लिए गठित समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग को अपनी रिपोर्ट तैयार करने में समय लगेगा। ऐसे में पंचायत चुनाव विधानसभा चुनाव के बाद कराए जाने की संभावना जताई जा रही है।
पहले एडीओ पंचायत बनते थे प्रशासक
अब तक परंपरा यह रही है कि ग्राम प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने पर एडीओ पंचायत को प्रशासक नियुक्त किया जाता था। लेकिन, इस बार सरकार ने गांवों में कामकाज की निरंतरता बनाए रखने और राष्ट्रीय पंचायत राज्य ग्राम प्रधान संघ की मांग को देखते हुए उन्हें ही प्रशासक बनाने का निर्णय लिया है।
डीएम को मिला अधिकार: आदेश के मुताबिक मंगलवार को प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद जिलाधिकारी निवर्तमान प्रधानों को प्रशासक नामित करेंगे। हालांकि प्रशासक केवल सामान्य और रूटीन कार्य ही कर सकेंगे। किसी भी बड़े या नीति संबंधी फैसले के लिए जिला पंचायत राज अधिकारी के माध्यम से डीएम की अनुमति लेना जरूरी होगा।
जुलाई में खत्म होगा क्षेत्र पंचायतों व जिला पंचायतों का कार्यकाल
प्रदेश में ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो रहा है। वहीं क्षेत्र पंचायतों का कार्यकाल 19 जुलाई और जिला पंचायतों का 11 जुलाई को खत्म होगा। ऐसे में जुलाई में इन संस्थाओं में भी प्रशासक नियुक्त किए जाने की संभावना बढ़ गई है।
आरक्षण प्रक्रिया पूरी होने में लगेगा समय
राज्य सरकार ने ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग बनाया है। आयोग जिलों में जाकर आबादी का आंकड़ा जुटाएगा और उसी आधार पर आरक्षण तय होगा। नियम के मुताबिक किसी ब्लॉक में ओबीसी आबादी 27 प्रतिशत से अधिक होने पर भी आरक्षण 27 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होगा। अगर आबादी इससे कम है तो उसी अनुपात में सीटें आरक्षित होंगी। आयोग को आरक्षण की इस प्रक्रिया को पूरा करने में अभी समय लगेगा।
