नेता प्रतिपक्ष के स्कूल को सत्ता समर्थित एमएलसी की मदद की चिट्ठी पर गर्माई राजनीति

नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव ने कहा कि ध्रुव कुमार त्रिपाठी की निधि से उनके स्कूल के लिए कोई मदद नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि अगर ध्रुव त्रिपाठी की निधि से मदद लिए जाने की बात साबित हो जाए तो अपने पद से इस्तीफा दे दूंगा।
विधायक निधि की एक चिट्ठी ने इन दिनों शिक्षक राजनीति को गर्मा दिया है। विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव के स्कूल को भाजपा के समर्थन से जीते एमएलसी ध्रुव कुमार त्रिपाठी के लेटर हेड पर पांच लाख रुपये की राशि दिए जाने के लिए सीडीओ आजमगढ़ के लिए पत्र भेजा गया। ये दोनों ही नेता वर्तमान में शिक्षक विधायक हैं। हालांकि, अमर उजाला से बातचीत में दोनों नेताओं ने पत्र लिखने या मदद लिए जाने से इंकार किया है।
प्रदेश में विधान परिषद की 11 स्नातक व शिक्षक सीटों पर अगले कुछ महीनों में चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में 12 जून 2021 के एक पत्र ने शिक्षक राजनीति में भूचाल सा ला दिया है। दरअसल, विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव का आजमगढ़ के मेहनगर में बाबा खुशिहाल स्मारक राधेकृष्ण इंटर कॉलेज है। ध्रुव त्रिपाठी के पैड पर लिखे गए इस पत्र में मेहनगर के इस इंटर कॉलेज में कक्ष निर्माण के लिए उनकी निधि से पांच लाख रुपये दिए जाने के लिए कहा गया है। यह पत्र मुख्य विकास अधिकारी, आजमगढ़ के लिए लिखा गया है।
यहां बता दें कि लाल बिहारी यादव वाराणसी से सपा के शिक्षक एमएलसी हैं, जबकि ध्रुव कुमार त्रिपाठी गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट से भाजपा के समर्थन से चुनाव जीते थे। प्रदेश में सपा और भाजपा के बीच ही राजनीतिक लड़ाई होती है, इसलिए यह वायरल चिट्ठी चर्चा का विषय है।

ध्रुव कुमार त्रिपाठी बोले- नेता प्रतिपक्ष के स्कूल के लिए मैंने नहीं लिखी कोई चिट्ठी :
इस बारे में एमएलसी ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने अमर उजाला को बताया कि उन्होंने बाबा खुशिहाल स्मारक कॉलेज के लिए न तो कभी कोई धनराशि दी और न ही इस तरह की कोई चिट्ठी लिखी।

लाल बिहारी यादव बोले- राशि लिए जाने की बात साबित हो जाए तो पद से दे दूंगा इस्तीफा
नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव ने अमर उजाला संवाददाता को आजमगढ़ के डीआरडीए कार्यालय के एक पत्र को भी भेजा, जिसमें बताया गया है कि ध्रुव कुमार त्रिपाठी की निधि से उनके स्कूल के लिए कोई मदद नहीं दी गई है। यह जानकारी सूचना के अधिकार अधिनियम-2005 के तहत दी गई है। लाल बिहारी यादव ने बताया कि इस संबंध में उनकी सपा नेतृत्व से भी बात हुई है। उन्होंने कह दिया है कि अगर ध्रुव त्रिपाठी की निधि से मदद लिए जाने की बात साबित हो जाए तो अपने पद से इस्तीफा दे दूंगा।

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